समीक्षा, परिंदे~ निर्मल वर्मा

समीक्षा, परिंदे~ निर्मल वर्मा

परिंदे, निर्मल वर्मा द्वारा रचित एक प्रसिद्ध यद्यपि आरम्भिक कहानी है। यह कहानी पूर्व दीप्ति शैली (फ्लैशबैक शैली), प्रतीकात्मक शैली तथा मनोविश्लेषणात्मक शैली के गुंफन से अपना आकार ग्रहण करता है। परिंदे कहानी सर्वप्रथम हंस पत्रिका में सन् 1957 में प्रकाशित हुई बाद में 1960 में प्रकाशित परिंदे कहानी संग्रह में यह प्रतिनिधि कहानी की … Read more

समीक्षा- धरती धन न अपना~ जगदीश चन्द्र

समीक्षा- धरती धन न अपना~ जगदीश चन्द्र

‘धरती धन न अपना’ उपन्यास ‘जगदीश चन्द्र’ द्वारा रचित उपन्यास है। यह उपन्यास पंजाब के होशियारपुर जिले के दोआब क्षेत्र के दलित समाज पर केंद्रित है। इसका प्रकाशन सन् 1972 ई. में हुआ था। दलित जीवन, सामाजिक असमानता और जमीनी संघर्ष का एक मार्मिक और यथार्थवादी उपन्यास है। यह उपन्यास पंजाब के ग्रामीण परिवेश में … Read more

उसने कहा था~ चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’

उसने कहा था~ चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’

उसने कहा था – तात्विक समीक्षा प्रस्तावना : हिंदी कहानी का आरंभिक स्वरूप नीति-कथा, लोककथा और उपदेशात्मक आख्यानों से निर्मित था। बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक आते-आते हिंदी कथा साहित्य एक ऐसे मोड़ पर खड़ा था जहाँ उसे आधुनिक मनुष्य की आंतरिक जटिलताओं, नैतिक द्वंद्वों और स्मृति-बोध को अभिव्यक्त करने वाली विधा बनना था। इसी … Read more

समीक्षा, ‘सवा सेर गेंहू’ मुंशी प्रेमचन्द

समीक्षा, 'सवा सेर गेंहू' मुंशी प्रेमचन्द

सवा सेर गेंहू जब से साहित्य में गद्य लिखने का प्रचलन प्रारंभ होने लगा तो साहित्य की विभिन्न विधाएं अपने अस्तित्व में आने लगी। उनमें से एक थी “ कहानी ” विधा। इसी आधार पर आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इस काल को “गद्य काल ” के नाम से संबोधित किया। अर्थात अब साहित्य की रचनाएं … Read more

समीक्षा, कसप~ मनोहर श्याम जोशी

समीक्षा, कसप~ मनोहर श्याम जोशी

‘कसप’ उपन्यास सन् 1982 में प्रकाशित हुआ जिसके लेखक हैं – मनोहर श्याम जोशी। ‘कसप’ एक कुमाऊंनी शब्द है जिसका मूलतः अर्थ हैं -‘क्या जाने? ‘ या ‘क्या पता?’ उपन्यास की शुरुआत कुमाऊंनी हिंदी के कुछ शब्दों का अर्थ बताते हुए होती है। इस उपन्यास को आंचलिक उपन्यास की श्रेणी में रखा जा सकता है … Read more

समीक्षा, जूठन ओमप्रकाश वाल्मीकि

समीक्षा, जूठन ओमप्रकाश वाल्मीकि

जिन दलित साहित्यकारों ने आत्मकथा लिखी उनमें सबसे महत्वपूर्ण तथा प्रसिद्ध ओमप्रकाश वाल्मीकि जी का “जूठन” है जो दो खंडों में प्रकाशित है। इस आत्मकथा में ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अपने जीवन के भोगें सहे नग्न यथार्थ को और जातिवादी मानसिकता, वेदना को दिखाया है। ओमप्रकाश वाल्मीकि का जूठन ‘1997’ में प्रकाशित हुआ है और यह … Read more

समीक्षा- आपका बंटी

समीक्षा, आपका बंटी~ मन्नू भंडारी

मन्नू भंडारी का ‘आपका बंटी’ हिन्दी साहित्य की दुर्लभ रचनाओं में से एक है। यह उपन्यास न केवल दाम्पत्य जीवन की कटु सच्चाइयों को उजागर करता है, बल्कि एक छोटे से बालक की आंतरिक उथल-पुथल को इतनी गहराई से खंगालता है कि पाठक स्वयं उसकी तड़प में सम्मिलित हो जाते हैं। 1971 में प्रकाशित यह … Read more

समीक्षा, झूठा सच- यशपाल

समीक्षा, झूठा सच- यशपाल

झूठा सच उपन्यास यशपाल द्वारा रचित है। यह उपन्यास दो खण्डों में विभक्त है। वतन और देश(1958) तथा देश का भविष्य(1960)। यह उपन्यास विभाजन की त्रासदी का चित्रण करने के साथ-साथ मानवीय जीवन की त्रासदी का चित्रण भी करता है। इस उपन्यास में मुख्य पात्र तारा, जयदेव पुरी और कनक हैं। इस उपन्यास में विभाजन … Read more

‘कोहबर की शर्त ‘ उपन्यास की समीक्षा

'कोहबर की शर्त ' उपन्यास की समीक्षा

‘कोहबर की शर्त ‘ उपन्यास सन् 1965 में प्रकाशित हुआ था जिसके लेखक हैं – केशव प्रसाद मिश्र। कोहबर की शर्त उपन्यास की कथा-भूमि इस वाक्य से पूर्ण रूप से बोधगम्य है – “दोआब में बसे हुए ये दो गांव – बलिहार और चौबेछपरा ही इस उपन्यास की कथा भूमि है।” इस उपन्यास का आरंभ … Read more

हिन्दी साहित्य इतिहास की लेखन परंपरा

हिन्दी साहित्य इतिहास की लेखन परंपरा

इतिहास लेखन वर्षों से चला आ रहा है। पिछले लेख में हमने हिंदी साहित्य के इतिहास दर्शन की बात की। इस लेख में हम हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन परंपरा की बात करेंगे। कि कैसे हिंदी साहित्य का इतिहास लिखा गया? इस इतिहास को लिखने में किन-किन विद्वानों का अहम योगदान था? और हिंदी साहित्य … Read more