• उसने कहा था~ चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’

    उसने कहा था~ चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी'

    उसने कहा था – तात्विक समीक्षा प्रस्तावना : हिंदी कहानी का आरंभिक स्वरूप नीति-कथा, लोककथा और उपदेशात्मक आख्यानों से निर्मित था। बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक आते-आते हिंदी कथा साहित्य

  • समीक्षा, कसप~ मनोहर श्याम जोशी

    समीक्षा, कसप~ मनोहर श्याम जोशी

    ‘कसप’ उपन्यास सन् 1982 में प्रकाशित हुआ जिसके लेखक हैं – मनोहर श्याम जोशी। ‘कसप’ एक कुमाऊंनी शब्द है जिसका मूलतः अर्थ हैं -‘क्या जाने? ‘ या ‘क्या पता?’ उपन्यास

  • समीक्षा, जूठन ओमप्रकाश वाल्मीकि

    समीक्षा, जूठन ओमप्रकाश वाल्मीकि

    जिन दलित साहित्यकारों ने आत्मकथा लिखी उनमें सबसे महत्वपूर्ण तथा प्रसिद्ध ओमप्रकाश वाल्मीकि जी का “जूठन” है जो दो खंडों में प्रकाशित है। इस आत्मकथा में ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अपने

  • समीक्षा, आपका बंटी~ मन्नू भंडारी

    समीक्षा- आपका बंटी

    मन्नू भंडारी का ‘आपका बंटी’ हिन्दी साहित्य की दुर्लभ रचनाओं में से एक है। यह उपन्यास न केवल दाम्पत्य जीवन की कटु सच्चाइयों को उजागर करता है, बल्कि एक छोटे

  • समीक्षा, झूठा सच- यशपाल

    समीक्षा, झूठा सच- यशपाल

    झूठा सच उपन्यास यशपाल द्वारा रचित है। यह उपन्यास दो खण्डों में विभक्त है। वतन और देश(1958) तथा देश का भविष्य(1960)। यह उपन्यास विभाजन की त्रासदी का चित्रण करने के

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