उसने कहा था~ चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’
उसने कहा था – तात्विक समीक्षा प्रस्तावना : हिंदी कहानी का आरंभिक स्वरूप नीति-कथा, लोककथा और उपदेशात्मक आख्यानों से निर्मित था। बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक आते-आते हिंदी कथा साहित्य एक ऐसे मोड़ पर खड़ा था जहाँ उसे आधुनिक मनुष्य की आंतरिक जटिलताओं, नैतिक द्वंद्वों और स्मृति-बोध को अभिव्यक्त करने वाली विधा बनना था। इसी … Read more