समीक्षा, ‘सवा सेर गेंहू’ मुंशी प्रेमचन्द

समीक्षा, 'सवा सेर गेंहू' मुंशी प्रेमचन्द

सवा सेर गेंहू जब से साहित्य में गद्य लिखने का प्रचलन प्रारंभ होने लगा तो साहित्य की विभिन्न विधाएं अपने अस्तित्व में आने लगी। उनमें से एक थी “ कहानी ” विधा। इसी आधार पर आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इस काल को “गद्य काल ” के नाम से संबोधित किया। अर्थात अब साहित्य की रचनाएं … Read more