कार्यालयी हिन्दी

जब आपको अपने मन की बात, भाव, विचार, आदि  किसी दूसरे व्यक्ति से साझा करना हो तो आप किसी ने किसी भाषा का सहारा लेते हैं। हम जिस भाषा में सहज रहते हैं उसी भाषा में अपने मन के भाव, विचार, आदि किसी दूसरे व्यक्ति या लोगों के बीच में साझा करते हैं। अतः हम कह सकते हैं कि भाषा के माध्यम से मानव अपने विचारों का आदान-प्रदान एक दूसरे से करता है।

किसी देश के सर्वांगीण विकास में भाषा की महती भूमिका होती है क्योंकि जिस देश की संपर्क भाषा जितनी अधिक मजबूत होगी उस देश में भावों, विचारों तथा सूचनाओं का आदान-प्रदान बहुत तीव्र गति से होगा। व्यक्ति से मिलकर परिवार बनता है। परिवार से मिलकर समाज बनता है। समाज से मिलकर राष्ट्र बनता है। तो हम कह सकते हैं कि एक व्यवस्थित समाज में जब कोई व्यक्ति रहता है तो प्रत्येक दिन कोई न कोई कार्य करता ही रहता है।

उस कार्य को करने के लिए वह जिस भाषा का प्रयोग करता है वह भाषा ही उसको अपने व्यक्तिगत कार्यों के संपादन में मदद करता है।  उसकी भाषा और उसका संप्रेषण जितना अधिक मजबूत होगा वह समाज में उतना सशक्त व्यक्ति बनाकर उभरेगा। हम सभी अपने कार्यों को संपादन करने के लिए कई प्रकार की भाषाओं का प्रयोग करते हैं। अगर हमें स्कूल में बात करनी है तो उसके लिए अलग भाषा, अगर हमें घर पर बात करनी है तो उसकी अलग भाषा, दोस्तों से बात करनी है तो उसकी अलग भाषा, पत्र लिखने की अलग भाषा ऐसे ही तमाम लेखन बातचीत के लिए हम कई तरह की भाषाओं का प्रयोग करते हैं।

कार्यालयी हिन्दी का स्वरुप-

हमारे पाठक्रम में कार्यालयी हिंदी लगा हुआ है तो जाहिर सी बात है कि हम हिंदी भाषा की बात करेंगे। हिंदी भाषा में लिखे जाने वाले तमाम लेखनों की बात करेंगे।  हम हिंदी भाषा की सभी माध्यमों की बात करेंगे जैसे- औपचारिक भाषा, अनौपचारिक भाषा, बोलचाल की भाषा, मानक भाषा, व्यावसायिक भाषा, कार्यालयी भाषा, राष्ट्रभाषा, संपर्क भाषा, संचार की भाषा आदि जैसा कि हम जानते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कार्यों को करने के लिए लगभग इन्हीं में से किसी न किसी भाषा स्वरूपों का प्रयोग करता है।

कार्यालयी हिन्दी की परिभाषा-

यहां पर हम थोड़ी चर्चा कार्यालयी भाषा की करेंगे। कार्यालयी भाषा से सीधा सा मतलब है कि वह भाषा जिसका प्रयोग कार्यालय के प्रशासनिक कार्यों में होता है। बोले तो कार्यालय के लिखा पढ़ी में जिस भाषा का प्रयोग किया जाता है उसे कार्यालयी भाषा कहते हैं।

अक्सर हम सुनते हैं कि सरकारी कार्यालय और गैर सरकारी कार्यालय (गवर्नमेंट ऑफिस और प्राइवेट ऑफिस) इन कार्यालय में बहुत सारे पत्र तथा अन्य दस्तावेज आदि प्राप्त होते हैं देश के कोने कोने से इन पत्रों और दस्तावेज के निपटान और प्रति उत्तर देने हेतु, टिप्पण प्रारूपन हेतु जिस भाषा का प्रयोग किया जाता है उसे कार्यालयी भाषा कहा जाता है। इसे राजभाषा भी कहा जाता है। वर्तमान समय में पूरे भारतवर्ष के केंद्रीय कार्यालयों की भाषा हिंदी तथा अंग्रेजी है।

थोड़ी सी चर्चा हम कार्यालयी भाषा के इतिहास पर करेंगे। जब हम इस बात का पड़ताल करते हैं तो पता चलता है कि प्राचीन काल में संस्कृत कामकाज एवं प्रशासन की भाषा थी। इसकी पुष्टि उस समय के प्राप्त लेखों, पत्रों, अभिलेखों एवं शिलालेखों से होती है क्योंकि ये लेख, पत्र, अभिलेख एवं शिलालेख संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं।

जब बाद में देश की राजनीतिक परिस्थितियों बदली मुगल आए तो मुगलों के शासन  में राजकाज की भाषा फारसी थी। फिर देश की राजनीति में एक आमूल चूल  परिवर्तन होता है। जब सत्ता के केंद्र में अंग्रेज स्थापित होते हैं तो उन्होंने सरकारी कामकाज की भाषा अंग्रेजी को बनाया। अगर हम राजपूत शासन की बात करें तो राजपूतों के शासनकाल में सरकारी कामकाज की भाषा राजस्थानी मिश्रित हिंदी थी।

लेकिन यहां पर हम अंग्रेजी शासन की बात करें तो आजादी की समय तक हिंदी जन भाषा के रूप में प्रयोग होती थी क्योंकि हिंदी के ताकत को देश के राजनेताओं समाजसुधारकों और तमाम स्वतंत्रता आंदोलनकारी समझ लिया था कि देश में विचार के, क्रांति के, भाव के, सूचनाओं आदि के प्रवाह या संप्रेषण की भाषा हिंदी ही है। उन्होंने सभी को हिंदी के प्रति सीखने समझने समर्पित होने का भाव भी पैदा किया।

1947 में जब भारत आजाद हुआ और 1948 में संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत संविधान के प्रारूप में राजभाषा संबंधी कोई विधायक नहीं था। बाद में इस विषय पर काफी वाद-विवाद हुआ कि देश का राजभाषा क्या होगा? तब 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने सर्वसम्मति से हिंदी को भारत की राजभाषा स्वीकार कर लिया और साथ में यह भी कहा कि अगले 15 वर्ष तक अंग्रेजी सह राजभाषा होगी। अभी तक वह 15 वर्ष की समय सीमा खत्म नहीं हुई इसलिए आज हिंदी के साथ अंग्रेजी भी भारत की राजभाषा है।

राजभाषा हिंदी को कार्यालयी हिंदी भी कहा जाता है। भारत के संविधान के 17 वें भाग के चार अध्याय में राजभाषा का उल्लेख किया गया है। पहले अध्याय 343 एवं 344 अनुच्छेद में संघ की भाषा के संबंध में दिशा निर्देश दिए गए हैं। जबकि दूसरे अध्याय 345, 346 तथा 347 अनुच्छेद में राजभाष के राज्यों की भाषाओं के स्तर पर प्रयोग को बताया गया है। तीसरे अध्याय 348 तथा 349 में यह बताया गया है कि भारत के उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई किस भाषा में होगी इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। अंतिम और चौथे अध्याय में अनुच्छेद 350 तथा 351 में समस्या के निवारण हेतु आवेदन में प्रयुक्त भाषा और हिंदी भाषा के विकास के संबंध प्रावधान किया गया है।  

कार्यालयी हिंदी का मुख्य प्रयोग क्षेत्र केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले कार्यालय में होता है इसलिए इन कार्यालय में होने वाले कामकाज की प्रक्रिया को जानने से पहले हम या जान ले कि केंद्र सरकार के अंतर्गत कौन-कौन से कार्यालय आते हैं। राजभाषा अधिनियम 1976 में केंद्र सरकार के कार्यालयों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। राजभाषा अधिनियम 1976 के नियम 2(ख) के अनुसार केंद्रीय मंत्रालय, केंद्रीय विभाग, केंद्रीय आयोग, समिति, केंद्रीय अभिकरण, केंद्र सरकार के स्वामित्व में आने वाली कोई भी कंपनी उपक्रम संस्थान निगम, भारतीय रिजर्व बैंक आफ इंडिया आदि जिसमें केंद्र सरकार का पूर्णतः स्वामित्व हो।

वर्तमान समय में कार्यालयी हिंदी को और आसान बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

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