
12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश में आम चुनाव हुए। बांग्लादेश की संसद को जातीय संसद कहा जाता है। जहां पर कुल 350 सदस्य निर्वाचित होकर संसद में आते हैं। अर्थात जिस पार्टी के 151 सदस्य जीतेंगे। उस पार्टी का प्रधानमंत्री होगा। बांग्लादेश के चुनाव में दो मुख्य पार्टियां मैदान में हैं। पहला बांग्लादेश नेशनल पार्टी और दूसरा जमाते इस्लामी।
बांग्लादेश नेशनल पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि सबसे पहले बांग्लादेश अर्थात जैसे इंडिया में मेक इन इंडिया चल रहा है वैसे ही बांग्लादेश नेशनल पार्टी ने पहले बांग्लादेश की बात की है। बीएनपी के मुखिया तारिक रहमान ने कहा है कि हम विश्व के सभी देशों से मित्रता करेंगे लेकिन अपनी शर्त पर करेंगे कोई हम पर दबाव डालकर अपनी मनमानी नहीं चला सकता। साथ ही बीएनपी ने कहा है कि हम भारत के साथ बराबरी का रिश्ता बनाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि हम पिछले 15 वर्ष में जो भी भारत के साथ संधि हुई है। उसकी हम समीक्षा करेंगे। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास करेंगे कोई संधि बांग्लादेश के खिलाफ तो नहीं है। बीएनपी के मुखिया तारीख रहमान बार-बार अपनी रैलियों में मुद्दा उठाते हैं कि तीस्ता और पद्मा नदी का जो जल बटवारा हुआ है वह बांग्लादेश के पक्ष में नहीं हुआ है। इसी तरह के कई और मुद्दे लेकर तारीख रहमान इस बार की बांग्लादेश की आम चुनाव में लड़ रहे हैं। बांग्लादेश में जब से तख्तापलट हुआ है तब से वहां के लोगों में भारत विरोधी भावनाएं भड़काई गई है।
वहीं दूसरी मुख्य पार्टी जमाते इस्लामी का कहना है कि हम भारत के साथ दोस्ताना रिश्ते तो बनाएंगे लेकिन उतना तवज्जो नहीं देंगे। ऐसा इसलिए माना जाता है कि जमाते इस्लामी पार्टी का झुकाव पाकिस्तान की तरफ ज्यादा है। ऐसा इसलिए हुआ है कि जब 1971 का युद्ध हुआ तब जमाते इस्लामी पाकिस्तान से अलग नहीं होना चाहता था। बल्कि वह उसके साथ रहना चाहता था अर्थात जमाते इस्लामी बांग्लादेश के रूप में नए देश बनने के विरोध में था। तो स्वाभाविक है कि जमाते इस्लामी का भारत के पक्ष में कोई झुकाव नहीं है।
बांग्लादेश के तख्तापलट में जिस तरह से छात्र और क्रांतिकारियों ने एक महिला के अंग वस्त्र को खुले में लहराया वे पढ़े लिखे छात्र और क्रांतिकारी तो कभी नहीं हो सकते!
काम तो 1977 से ही शुरू हो गया था जब धर्मनिरपेक्षता को संविधान की अवधारणा से हटा दिया गया। 1988 में जब इस्लाम को बांग्लादेश का राजकीय धर्म घोषित किया गया तो बांग्लादेश की आम जनता नहीं मारी गई। मारी गई बांग्लादेश की हिंदू जनता या फिर उसने धर्म परिवर्तन किया। जोय बांग्लादेश के स्थान पर बांग्लादेश जिंदाबाद कर दिया गया। क्योंकि जोय हिंदी शब्द है और जिंदाबाद उर्दू शब्द है। 1996 तक सैनिक शासन रहा इतने ही समय में उन्होंने अपना काम पूर्ण दिया। हिंदू आबादी 27 % थी। आज वो घटकर 8 से 9% हो गई।
1971 में जिस बंग बंधु शेख मुजीबुर रहमान ने बांग्लादेश को आजादी दिलाई 1975 में उनकी हत्या कर दी जाती है। साथ में उनके परिवार के 16 और सदस्यों की हत्या की जाती है। हत्या करने वाले वह लोग थे जो पाकिस्तान से आजादी नहीं चाहते थे। और उन्होंने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान का साथ दिया।
जनरल टिक्का खान जिसको बूचर ऑफ बांग्लादेश बोला जाता है। उसने अपनी सेना से कहा कि यह छोटे काले, नाटे कद के और दूसरी भाषा बोलने वाले मुसलमान है। यह पक्के मुसलमान नहीं है। इनकी बहन बेटियों और माताओं के साथ इतना शारीरिक शोषण करो कि इनकी आने वाली नस्लें सुधार जाएं। इसके बाद आपरेशन सर्च लाइट चलाया गया और लगभग 30 लाख लोगों की हत्या की गई।
किसी को शांति का नोबेल पुरस्कार तभी मिलता है जब वह धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक तथा अल्पसंख्यक के हितों को मानने वाला व्यक्ति हो। यह महाशय हैं बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुखिया यूनुस खान। इनको शांति का नोबेल पुरस्कार मिला है। इन्होंने एक सर्कुलर जारी करके कहा है कि बांग्लादेश में रह रहे 10 लाख रोहिंग्या मुसलमानों को शरण दिया जाएगा। उनको राशन पानी दिया जाएगा। उनका रहने के लिए जगह दिया जाएगा। लेकिन बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यक जो उसे देश के टैक्स पेयर हैं पर उनको नहीं रहने दिया जाएगा।
9 अगस्त को हुए तख्तापलट में सबसे ज्यादा हमला अल्पसंख्यकों पर हुआ लेकिन उनको क्षतिपूर्ति का कोई मुआवजा नहीं दिया गया। उनके इलाज करने के लिए कोई सहायता नहीं दिया जाएगा। उनके परिजन मारे गए उसके लिए कुछ नहीं दिया जाएगा। उनके धार्मिक स्थलों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। शेख हसीना ने एक सर्कुलर जारी किया था कि अब बांग्लादेश में किसी रोहिंग्या को शरण नहीं दिया जाएगा। इस आंदोलन में रोहिंग्या मुसलमानों ने भी भाग लिया। धीरे-धीरे इस गौरवपूर्ण क्रांति के सारे सच उजागर होंगे। हमेशा बड़ी मछली, छोटी मछली को खा जाती है। तो छोटी मछली कौन है? बांग्लादेश के अल्पसंख्यक।
मोंगला बंदरगाह बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है। इसका कंट्रोल शेख हसीना ने चीन की जगह भारत को दे दिया। तीस्ता परियोजना भारत को दे दिया गया। बंगाल से त्रिपुरा तक रेलवे ट्रांजीट कॉरिडोर दे दिया गया। सीमा विवाद को सुलझा लिया गया। इनको बुरा लग रहा था कि चीन और अमेरिका को बाईपास किया जा रहा है।
1971 के युद्ध में चीन और अमेरिका ने पश्चिमी पाकिस्तान का समर्थन किया था। और जो बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी है बीएनपी वह कभी नहीं चाहती थी कि हम पश्चिमी पाकिस्तान से अलग होकर पूर्वी पाकिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र बांग्लादेश बने। भारत ने चीन अमेरिका और इंग्लैंड के छाती पर दाल दरते हुए युद्ध जीत लिया तो इसकी पीड़ा तो होगी उनको।
इस हार के बाद चीन और सीआईए ने यूनुस खान को प्लांट किया। अगर किसी की क्रेडिबिलिटी बढ़ानी है तो उसको आप पुरस्कार दे दीजिए जैसे कोई साहित्य की किताब नहीं बिक रही है आप उसको ज्ञानपीठ पुरस्कार दे दीजिए। कल से उस किताब के लिए लाइन लग जाएगी तो वही खेल यूनुस खान के साथ किया गया।
शेख हसीना को भारत में दूसरी बार पॉलिटिकल एसाइलम दिया गया है। इसके पहले उनको इंदिरा गांधी ने पॉलीटिकल एसाइलम दिया था। जब बांग्लादेश का राजकीय धर्म इस्लाम घोषित कर दिया गया धर्मनिरपेक्षता को हटाकर। शेख हसीना के परिवार के 17 लोगों की हत्या कर दी गई।
द संडे टाइम के पत्रकार मस्क्रेनस का रिपोर्ट है। जो तब के पूर्वी पाकिस्तान और आज के बांग्लादेश में जाकर जो देखा था उसको लिखा। 30 लाख लोगों की हत्या हुई। यह सरकारी आंकड़ा है जिसमें पुरुष महिला और बच्चे सभी शामिल थे। पाकिस्तान की सेना दो सवाल पूछती थी लोगों से कि तुम मुक्ति वाहिनी के फौजी( मुक्ति वाहिनी मतलब बांग्लादेश के वह लोग जिनको भारतीय सेना ने ट्रेंड किया था पाकिस्तानी सेना से लड़ने के लिए) या फिर हिंदू हो अगर इनमें से कोई एक होता था। उसकी हत्या कर दी जाती थी।
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