‘कोहबर की शर्त ‘ उपन्यास की समीक्षा

'कोहबर की शर्त ' उपन्यास की समीक्षा

‘कोहबर की शर्त ‘ उपन्यास सन् 1965 में प्रकाशित हुआ था जिसके लेखक हैं – केशव प्रसाद मिश्र। कोहबर की शर्त उपन्यास की कथा-भूमि इस वाक्य से पूर्ण रूप से बोधगम्य है – “दोआब में बसे हुए ये दो गांव – बलिहार और चौबेछपरा ही इस उपन्यास की कथा भूमि है।” इस उपन्यास का आरंभ … Read more

हिन्दी साहित्य इतिहास की लेखन परंपरा

हिन्दी साहित्य इतिहास की लेखन परंपरा

इतिहास लेखन वर्षों से चला आ रहा है। पिछले लेख में हमने हिंदी साहित्य के इतिहास दर्शन की बात की। इस लेख में हम हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन परंपरा की बात करेंगे। कि कैसे हिंदी साहित्य का इतिहास लिखा गया? इस इतिहास को लिखने में किन-किन विद्वानों का अहम योगदान था? और हिंदी साहित्य … Read more

साहित्य इतिहास का दर्शन

साहित्य इतिहास का दर्शन

अगर हमें भारत का इतिहास जानना है तो हमारी पहली कड़ी होगी कि हम भारत के समाज के रूपरेखा उसके बनावट का इतिहास को जाने। तभी हम सुसंगठित और तथ्यों के साथ भारत का स्पष्ट इतिहास लिख सकते हैं। यही बात साहित्य पर भी लागू होता है क्योंकि किसी भी साहित्य के इतिहास का निर्माण … Read more

महाजनपद

महाजनपदों का उदय लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व मे गंगा और यमुना एवं बिहार में लोहे के अत्यधिक प्रयोग के कारण अधिक उत्पादन होने लगा था। उत्तर वैदिक काल के जनपद अब महाजनपदों में बदल गए। बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में 16 महाजनपदों की जानकारी मिलती है। अंगुत्तर निकाय में … Read more

गुप्तकालीन धर्म और कला

गुप्तकालीन धर्म और कला

गुप्त शासको का अपना धर्म वैष्णव था लेकिन वह अन्य धर्म के प्रति भी उदारवादी थे। दो गुप्त शासको समुद्रगुप्त और कुमार गुप्त को अश्वमेध यज्ञ करने का श्रेय प्राप्त है।  वैष्णव धर्म– गुप्त शासको का राजकीय धर्म वैष्णव भी था। उन्होंने परमभागवत की उपाधि धारण की तथा ‘गरुड़’ को अपना राजकीय चिन्ह बनाया। गुप्तकालीन … Read more

गुप्तकालीन प्रशासन

गुप्तकालीन प्रशासन

गुप्त राजाओं का काल भारतीय इतिहास में ‘स्वर्णयुग’ के नाम से प्रसिद्ध है। इस सभ्यता और संस्कृति के प्रत्येक क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। अब हम इन्ही विकास की चर्चा करेंगे। प्रशासन- गुप्त शासन का मुख्य केंद्र बिंदु राजा होता था। गुप्त शासक महाराजाधिराज और परमभट्टारक जैसी बड़ी उपाधियां धारण करते थे। राजा की … Read more

मौर्य प्रशासन और कला

मौर्य प्रशासन और कला

गुप्तचर प्रशासन- मौर्य काल में गुप्तचर प्रशासन का महत्वपूर्ण स्थान था मौर्य काल में गुप्तचरों को गूढ़पुरुष कहा जाता था। मौर्य काल में 5 प्रकार के गुप्तचरों का पता चलता है जो निम्नलिखित हैं- संस्था – विभागो से संबंधित जानकारियां जुटाते थे। कपटिक – ये विद्यार्थियों के वेश में रहते थे। उदस्थित – ये साधुओं … Read more

मौर्य साम्राज्य

मौर्य साम्राज्य

नन्द वंश के अन्तिम शासक धनानंद को मारकर चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना किया। यूनानी लेखकों ने उसका नाम सेंड्रोकोट्स बताया। सर्वप्रथम इसकी पहचान चंद्रगुप्त मौर्य के रूप में सर विलियम जोन्स ने किया। चंद्रगुप्त की राजधानी पोलीब्रोथा (पाटलिपुत्र) थी । जानकारी के स्रोत कौटिल्य का अर्थशास्त्र – मौर्यो का इतिहास जानने के … Read more

महाकाल-2

महाकालेश्वर

जो मृत्यु को जीत ले वह है ‌महाकाल, अपने भक्तों की रक्षा करें और काल को मारे वह हैं महाकालेश्वर। ऐतिहासिक विरासत से भरपूर भारत का ह्रदय मध्य प्रदेश में स्थित शहर उज्जैन में शिव के सबसे बड़े रूप और बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर विराजमान हैं। ढाई हजार साल पहले अवंतिका अब … Read more

प्रयागराज कुंभ-1

प्रयागराज कुंभ

प्रयागराज कुंभ में विश्व के कोने कोने से आने वाले भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक मेला जहां एक ही समय, एक ही जगह उमड़ता है तीर्थयात्री सैलानी, जिज्ञासु और भक्तों का सैलाब। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भारत की सबसे लंबी, पवित्र और पावन नदी गंगा से होता … Read more