जब से साहित्य में गद्य लिखने का प्रचलन प्रारंभ होने लगा तो साहित्य की विभिन्न विधाएं अपने अस्तित्व में आने लगी। उनमें से एक थी “ कहानी ” विधा। इसी
जब से साहित्य में गद्य लिखने का प्रचलन प्रारंभ होने लगा तो साहित्य की विभिन्न विधाएं अपने अस्तित्व में आने लगी। उनमें से एक थी “ कहानी ” विधा। इसी
‘कसप’ उपन्यास सन् 1982 में प्रकाशित हुआ जिसके लेखक हैं – मनोहर श्याम जोशी। ‘कसप’ एक कुमाऊंनी शब्द है जिसका मूलतः अर्थ हैं -‘क्या जाने? ‘ या ‘क्या पता?’ उपन्यास
जिन दलित साहित्यकारों ने आत्मकथा लिखी उनमें सबसे महत्वपूर्ण तथा प्रसिद्ध ओमप्रकाश वाल्मीकि जी का “जूठन” है जो दो खंडों में प्रकाशित है। इस आत्मकथा में ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अपने
मन्नू भंडारी का ‘आपका बंटी’ हिन्दी साहित्य की दुर्लभ रचनाओं में से एक है। यह उपन्यास न केवल दाम्पत्य जीवन की कटु सच्चाइयों को उजागर करता है, बल्कि एक छोटे
झूठा सच उपन्यास यशपाल द्वारा रचित है। यह उपन्यास दो खण्डों में विभक्त है। वतन और देश(1958) तथा देश का भविष्य(1960)। यह उपन्यास विभाजन की त्रासदी का चित्रण करने के
‘कोहबर की शर्त ‘ उपन्यास सन् 1965 में प्रकाशित हुआ था जिसके लेखक हैं – केशव प्रसाद मिश्र। कोहबर की शर्त उपन्यास की कथा-भूमि इस वाक्य से पूर्ण रूप से
इतिहास लेखन वर्षों से चला आ रहा है। पिछले लेख में हमने हिंदी साहित्य के इतिहास दर्शन की बात की। इस लेख में हम हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन परंपरा
अगर हमें भारत का इतिहास जानना है तो हमारी पहली कड़ी होगी कि हम भारत के समाज के रूपरेखा उसके बनावट का इतिहास को जाने। तभी हम सुसंगठित और तथ्यों
16 महाजनपदों का उदय लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व मे गंगा और यमुना एवं बिहार में लोहे के अत्यधिक प्रयोग के कारण अधिक उत्पादन होने लगा था। उत्तर वैदिक काल
गुप्त शासको का अपना धर्म वैष्णव था लेकिन वह अन्य धर्म के प्रति भी उदारवादी थे। दो गुप्त शासको समुद्रगुप्त और कुमार गुप्त को अश्वमेध यज्ञ करने का श्रेय प्राप्त