यदि हम ‘कहानी’ के अर्थ की बात करें तो ‘कहानी’ शब्द पाश्चात्य अंग्रेजी के ‘शॉर्ट स्टोरी’ का समानार्थी है। जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘कहना’। वही संस्कृत में ‘कथ’ धातु
यदि हम ‘कहानी’ के अर्थ की बात करें तो ‘कहानी’ शब्द पाश्चात्य अंग्रेजी के ‘शॉर्ट स्टोरी’ का समानार्थी है। जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘कहना’। वही संस्कृत में ‘कथ’ धातु
कोसी का घटवार कहानी शेखर जोशी द्वारा लिखी गई है। यह कहानी 1958 में प्रकाशित हुई। कोसी का घटवार पूर्वदिप्ति शैली में लिखी गई एक आंचलिक कहानी है। कहानी में
परिंदे, निर्मल वर्मा द्वारा रचित एक प्रसिद्ध यद्यपि आरम्भिक कहानी है। यह कहानी पूर्व दीप्ति शैली (फ्लैशबैक शैली), प्रतीकात्मक शैली तथा मनोविश्लेषणात्मक शैली के गुंफन से अपना आकार ग्रहण करता
उसने कहा था – तात्विक समीक्षा प्रस्तावना : हिंदी कहानी का आरंभिक स्वरूप नीति-कथा, लोककथा और उपदेशात्मक आख्यानों से निर्मित था। बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक आते-आते हिंदी कथा साहित्य
जब से साहित्य में गद्य लिखने का प्रचलन प्रारंभ होने लगा तो साहित्य की विभिन्न विधाएं अपने अस्तित्व में आने लगी। उनमें से एक थी “ कहानी ” विधा। इसी
‘कसप’ उपन्यास सन् 1982 में प्रकाशित हुआ जिसके लेखक हैं – मनोहर श्याम जोशी। ‘कसप’ एक कुमाऊंनी शब्द है जिसका मूलतः अर्थ हैं -‘क्या जाने? ‘ या ‘क्या पता?’ उपन्यास
जिन दलित साहित्यकारों ने आत्मकथा लिखी उनमें सबसे महत्वपूर्ण तथा प्रसिद्ध ओमप्रकाश वाल्मीकि जी का “जूठन” है जो दो खंडों में प्रकाशित है। इस आत्मकथा में ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अपने
मन्नू भंडारी का ‘आपका बंटी’ हिन्दी साहित्य की दुर्लभ रचनाओं में से एक है। यह उपन्यास न केवल दाम्पत्य जीवन की कटु सच्चाइयों को उजागर करता है, बल्कि एक छोटे
झूठा सच उपन्यास यशपाल द्वारा रचित है। यह उपन्यास दो खण्डों में विभक्त है। वतन और देश(1958) तथा देश का भविष्य(1960)। यह उपन्यास विभाजन की त्रासदी का चित्रण करने के
‘कोहबर की शर्त ‘ उपन्यास सन् 1965 में प्रकाशित हुआ था जिसके लेखक हैं – केशव प्रसाद मिश्र। कोहबर की शर्त उपन्यास की कथा-भूमि इस वाक्य से पूर्ण रूप से