समीक्षा, झूठा सच- यशपाल
झूठा सच उपन्यास यशपाल द्वारा रचित है। यह उपन्यास दो खण्डों में विभक्त है। वतन और देश(1958) तथा देश का भविष्य(1960)। यह उपन्यास विभाजन की त्रासदी का चित्रण करने के साथ-साथ मानवीय जीवन की त्रासदी का चित्रण भी करता है। इस उपन्यास में मुख्य पात्र तारा, जयदेव पुरी और कनक हैं। इस उपन्यास में विभाजन … Read more